अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हर दिन लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ दान चढ़ाते हैं — लेकिन क्या हो अगर यही पवित्र दान करोड़ों के कथित घोटाले की भेंट चढ़ जाए? मामले की शुरुआत हुई एक बेहद मामूली सी घटना से: मंदिर परिसर के एक वॉशरूम में मिली सिर्फ ₹40,000 की एक गड्डी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह छोटी सी बरामदगी आगे चलकर पुलिस, SIT और सीधे राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा देगी। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की शुरुआत से अब तक की पूरी कहानी।
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला — SIT जांच जारी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
📑 इस लेख में क्या है? (Table of Contents)
⚡ फटाफट जानकारी (Quick Facts)
- पहला सुराग: मई 2026 के अंत में वॉशरूम से मिली ₹40,000 की नकदी
- औपचारिक शिकायत: 4 जून 2026 को प्रशासन को सूचना
- 17 घंटे में वसूली: अयोध्या, बहराइच (नानपारा) और प्रतापगढ़ (कुंडा) से लगभग ₹80 लाख नकद बरामद
- CCTV खुलासा: करीब 40 दिनों में 70 बार चोरी (औसतन रोज़ाना 2 बार)
- SIT गठन: 13 जून 2026 को CM योगी आदित्यनाथ के आदेश पर 3-सदस्यीय SIT बनी
- गिरफ्तारियां: अब तक 8 लोगों पर आरोप, कई गिरफ्तार
- ट्रस्ट का दावा: कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि के अनुसार कुल नुकसान करीब ₹3 करोड़ हो सकता है (जांच में)
🚪 शुरुआत: वॉशरूम में मिली 40,000 की गड्डी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला मई 2026 के अंत में तब सामने आया जब राम मंदिर परिसर के एक गेटकीपर को वॉशरूम में ₹40,000 की एक नकद गड्डी मिली। किसी औपचारिक शिकायत या टेक्निकल ऑडिट से नहीं, बल्कि एक कर्मचारी की सतर्कता से इस मामले का खुलासा हुआ। गेटकीपर ने तुरंत यह बात श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक ट्रस्टी को बताई, जिसके बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की और बाद में 4 जून 2026 को जिला प्रशासन को औपचारिक रूप से सूचित किया।
👮 पुलिस की कार्रवाई: 17 घंटे में 80 लाख की वसूली
रिपोर्ट्स के अनुसार, औपचारिक शिकायत दर्ज होने के महज 17 घंटों के भीतर पुलिस टीमों ने अयोध्या, बहराइच (नानपारा) और प्रतापगढ़ (कुंडा) सहित कई जिलों से मिलाकर लगभग ₹80 लाख नकद बरामद कर लिए। जांच में रामाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश जैसे नाम सामने आए, जिनके ठिकानों से नकदी के अलावा गहने भी बरामद होने की खबर है। एक आरोपी लवकुश मिश्रा के घर से मिली रकम का कुछ हिस्सा अलमारी में और कुछ हिस्सा गोबर में छिपाकर रखा गया था। दिलचस्प बात यह है कि आरोपियों की मासिक आय महज ₹18,000-20,000 के आसपास बताई जाती है, जबकि जांच में सामने आया कि किसी ने हाल ही में ₹1.5 करोड़ की जमीन खरीदी तो किसी ने ₹40 लाख की संपत्ति अर्जित की — जो कमाई और संपत्ति के बीच के इस भारी अंतर पर ही जांच एजेंसियों का शक गहराया।
📹 CCTV से खुलासा: 40 दिनों में 70 बार चोरी
जांच के दौरान जब CCTV फुटेज खंगाली गई, तो एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 40 दिनों की अवधि में लगभग 70 बार चोरी की वारदातें हुईं — यानी औसतन रोज़ाना करीब दो बार। इनमें से लगभग 50 बार (कुल घटनाओं का करीब 71%) में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला खुद रकम निकालता नजर आया, जबकि अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा जैसे अन्य आरोपी कथित तौर पर "कवर" देने का काम करते थे, ताकि बाकी स्टाफ को भनक न लगे। इस खुलासे के बाद मंदिर प्रशासन ने दान गिनती (काउंटिंग) की पूरी प्रक्रिया में बदलाव किए।
🔍 SIT रिपोर्ट: बरसों से चली आ रही लापरवाही
मामला सामने आने के बाद CM योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया, जिसमें IAS विजय विश्वास पंत (लखनऊ मंडलायुक्त), IPS किरण एस. (पुलिस महानिरीक्षक) और नीलरतन (वित्त सचिव) शामिल हैं। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह सामने आया कि यह किसी एक संगठित डकैती से ज़्यादा एक सिस्टम की भारी लापरवाही का नतीजा है:
- अलग-अलग हुंडियों (दान पात्रों) की नकदी को गिनती से पहले आपस में मिला दिया जाता था, जिससे किस हुंडी में कितना दान आया, यह ट्रैक करना ही मुश्किल हो जाता था।
- नकदी ले जाने वाले बक्सों पर कोई नंबरिंग सिस्टम नहीं था, जिससे यह पता लगाना मुश्किल था कि रकम किस हुंडी से आई और कितनी अभी तक गिनी नहीं गई।
- गहनों/आभूषणों के दान के लिए तीन अलग-अलग माध्यम मौजूद थे, लेकिन उनके दस्तावेज़ीकरण, वजन और तस्वीरें लेने की प्रक्रिया में भारी खामियां थीं।
- स्टाफ के लिए "बिना जेब वाली वर्दी" और रोज़ाना तलाशी (फ्रिस्किंग) जैसे नियम फरवरी 2026 में ढीले कर दिए गए और सिर्फ "रैंडम चेकिंग" तक सीमित रह गए।
- CCTV फुटेज पर नियमित निगरानी नहीं रखी जाती थी, और 180 दिनों तक फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश को भी नजरअंदाज किया गया।
💰 80 लाख या 3 करोड़? ट्रस्ट के आंकड़ों में भी विरोधाभास
इस पूरे मामले में एक और पेचीदा पहलू सामने आया है — पुलिस ने अब तक करीब ₹79-80 लाख नकद बरामद किए हैं, जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का दावा है कि कुल नुकसान करीब ₹3 करोड़ तक हो सकता है। SIT अभी यह जांच कर रही है कि यह ₹3 करोड़ का आंकड़ा किस आधार पर दिया गया है — यानी क्या इसका समर्थन ऑडिट रिपोर्ट, कैश मैचिंग, CCTV फुटेज या किसी अन्य दस्तावेज़ से होता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक करीब ₹78.94 लाख औपचारिक जांच शुरू होने से पहले ही कर्मचारियों से बरामद हो चुके थे, और अतिरिक्त ₹2.25 लाख एक बाथरूम से मिले थे। कुल मिलाकर 8 लोगों पर आरोप हैं, और हाल ही में रामाशंकर मिश्रा तथा नकद-गिनती की निगरानी करने वाले सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस चोरी की गई संपत्ति का पता लगाने के लिए कुछ आरोपियों की हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग कर रही है।
| तारीख/अवधि | घटनाक्रम |
|---|---|
| मई 2026 (अंत) | वॉशरूम में ₹40,000 की गड्डी मिली, गेटकीपर ने ट्रस्टी को सूचित किया |
| 4 जून 2026 | ट्रस्ट ने जिला प्रशासन को औपचारिक शिकायत दी |
| 4-5 जून 2026 | 17 घंटों के भीतर ~₹80 लाख की वसूली, पहली गिरफ्तारियां |
| 7 जून 2026 | अखिलेश यादव व अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया |
| 13 जून 2026 | CM योगी आदित्यनाथ के आदेश पर 3-सदस्यीय SIT का गठन |
| जुलाई 2026 | SIT रिपोर्ट में सुरक्षा खामियां उजागर; कोषाध्यक्ष का ₹3 करोड़ नुकसान का दावा; और गिरफ्तारियां |
🗳️ राजनीतिक घमासान
इस मामले ने जल्द ही राजनीतिक रंग भी ले लिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगी सरकार पर निशाना साधा और इसे "गंभीर चिंता" का विषय बताते हुए मंदिर परिसर की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी "निष्पक्ष और पारदर्शी जांच" की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। दूसरी ओर, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद ही "गलत सूचना" फैलने से रोकने और मंदिर की छवि बचाने के लिए जांच की मांग की थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने SIT का गठन किया।
जवाबदेही के मामले में अब तक सीमित कार्रवाई ही सामने आई है — ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय ने अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए "नैतिक आधार" पर इस्तीफा दे दिया, जबकि कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने इस्तीफे के सुझावों को खारिज करते हुए अपनी जवाबदेही पर पूछे गए सवालों का बचावात्मक रुख अपनाया।
🌸 निष्कर्ष
राम मंदिर दान चोरी मामला यह दिखाता है कि कैसे एक मामूली सी बरामदगी — वॉशरूम में मिली सिर्फ ₹40,000 की गड्डी — करोड़ों रुपयों की कथित अनियमितता की परतें खोल सकती है। SIT जांच अभी जारी है, और ₹80 लाख बनाम ₹3 करोड़ के आंकड़ों के बीच का फासला अब भी अनसुलझा है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक सटीक नुकसान, जिम्मेदार लोगों की पूरी सूची और आगे की कार्रवाई के बारे में अंतिम रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता — इसलिए इस मामले से जुड़े हर अपडेट के लिए आधिकारिक SIT रिपोर्ट और मान्यता प्राप्त समाचार स्रोतों पर ही भरोसा करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. राम मंदिर दान चोरी मामला सबसे पहले कैसे सामने आया?
मई 2026 के अंत में मंदिर परिसर के एक वॉशरूम से ₹40,000 की नकद गड्डी मिलने के बाद एक गेटकीपर की सतर्कता से यह मामला सामने आया।
2. अब तक कितनी रकम बरामद हो चुकी है?
औपचारिक शिकायत के 17 घंटों के भीतर पुलिस ने अयोध्या, बहराइच और प्रतापगढ़ से मिलाकर करीब ₹80 लाख नकद बरामद किए। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष का दावा है कि कुल नुकसान इससे कहीं ज़्यादा, करीब ₹3 करोड़ तक हो सकता है — इसकी पुष्टि जांच में होनी बाकी है।
3. CCTV फुटेज में क्या सामने आया?
करीब 40 दिनों में 70 बार चोरी की वारदातें पकड़ी गईं, यानी औसतन रोज़ाना करीब 2 बार। इनमें से करीब 71% घटनाओं में एक ही मुख्य आरोपी शामिल पाया गया।
4. SIT का गठन कब और क्यों किया गया?
CM योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को 3-सदस्यीय SIT का गठन किया, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और दान गिनती प्रक्रिया व सुरक्षा व्यवस्था की खामियों का पता लगाया जा सके।
5. अब तक कितने लोगों पर आरोप हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 8 लोगों पर आरोप हैं, जिनमें से कई को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दान गिनती केंद्र से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं।
6. SIT रिपोर्ट में मुख्य खामी क्या बताई गई है?
अलग-अलग हुंडियों की नकदी को गिनती से पहले मिला देना, नकदी बक्सों पर नंबरिंग न होना, तलाशी (फ्रिस्किंग) के नियम ढीले करना और CCTV निगरानी की कमी — ये सभी बातें SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आई हैं।
7. क्या ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी ने इस्तीफा दिया?
हां, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय ने अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए "नैतिक आधार" पर इस्तीफा दिया है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने इस्तीफे से इनकार किया है।
📌 इस लेख की जानकारी Patrika, AajTak, The Week, Prabhat Khabar, OpIndia और State Mirror की जुलाई 2026 तक की रिपोर्टों पर आधारित है। यह मामला अभी SIT जांच के अधीन है, इसलिए आंकड़े और तथ्य आगे बदल/अपडेट हो सकते हैं। कृपया प्रकाशन से पहले नवीनतम आधिकारिक अपडेट ज़रूर जांच लें।
NOTE : यहां दी गई जानकारी एक सामान्य अनुमान और धारणा ओ के आधारित हे किसी भी जानाकरी कोई निष्कर्ष पर कृपया ना पोहचे। जानकारी के अनुरूप Expert की सलाह जरूर ले. धन्यवाद
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