सोमनाथ मंदिर Live Darshan

इतिहास • आस्था • पुनर्निर्माण

सोमनाथ मंदिर: सात बार तोड़ा गया, सात बार फिर खड़ा हुआ

करीब दो हज़ार साल पुराना यह ज्योतिर्लिंग बार-बार आक्रमणों से नष्ट हुआ, फिर भी हर बार राख से उठकर खड़ा हो गया — जानिए इसकी पूरी गाथा।

गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला माना जाता है। इसका इतिहास केवल पत्थर और सोने का नहीं, बल्कि बार-बार टूटने और हर बार पहले से भव्य रूप में खड़े होने की जिजीविषा का इतिहास है। आइए इस मंदिर की सदियों पुरानी यात्रा को सिलसिलेवार समझते हैं।

🛕 शुरुआत: पहला मंदिर और वल्लभी शासन

🏛️ लगभग 2000 साल पुरानी नींव

सोमनाथ का पहला मंदिर लगभग दो हज़ार साल पहले अस्तित्व में आया था। वर्ष 649 में वल्लभवंश के शासक राजा मैत्रक ने इस पहले मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर उसके स्थान पर एक नया मंदिर बनवाया।

👑 भोज परमार का उल्लेख

परमार वंश के एक शिलालेख के अनुसार मालवा के राजा भोज परमार द्वारा भी यहाँ एक मंदिर बनवाया गया था। कहा जाता है कि यह मंदिर 13 मंजिला ऊँचा था, इसके द्वार हीरों से जड़े थे और शिखर पर 16 स्वर्ण कलश विराजमान थे। ऊँचे-ऊँचे फहराते ध्वज दूर समुद्र में नाविकों को सोमनाथ मंदिर की दिशा दिखाया करते थे।

⚔️ अरब आक्रमण और तीसरा निर्माण (815 ई.)

🔥 वल्लभी साम्राज्य का पतन

वल्लभी साम्राज्य के पतन के साथ सोमनाथ अरब आक्रमणकारियों के अधीन आ गया। सिंध के अरब शासक जुनैद ने अपनी सेना सहित मंदिर पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया। इसके बाद प्रतिहार वंश के राजा नागभट्ट द्वितीय ने वर्ष 815 में लाल पत्थर (बलुआ पत्थर) का उपयोग करके मंदिर का तीसरी बार निर्माण कराया।

💥 महमूद गज़नवी का विनाशकारी आक्रमण

🩸 आठ दिन का खूनी संघर्ष

ग्यारहवीं शताब्दी में महमूद गज़नवी ने हिंदुओं के साथ आठ दिनों की भीषण लड़ाई के बाद प्रभास के मज़बूत किले को ध्वस्त कर दिया। राजा भीमदेव प्रथम को हार का सामना करना पड़ा और बड़ी संख्या में लोग मारे गए।

💰 पाँच करोड़ की पेशकश, फिर भी विनाश

जब महमूद की सेना पाँच गज ऊँची और दो गज चौड़ी शिवमूर्ति को तोड़ने लगी, तो शिवभक्त कहे जाने वाले एक व्यक्ति ने उसे बचाने के बदले भारी धनराशि की पेशकश की। कथा के अनुसार महमूद ने धन लेने से इनकार करते हुए कहा कि उसे मूर्तियाँ तोड़ने में ही अधिक संतोष मिलता है। अंततः सोमनाथ को लूटकर जला दिया गया और शिवलिंग के टुकड़े कर दिए गए। कहा जाता है कि इन टुकड़ों को गज़नी ले जाकर एक मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबा दिया गया।

(असल वेबसाइट पर पब्लिश करते समय इन दोनों लिंक्स को अपनी साइट के वास्तविक संबंधित लेखों से बदलें)

🏗️ परमार-सोलंकी काल का पुनर्निर्माण (1026-1042)

🙏 चौथा मंदिर

चौथा मंदिर मालवा के परमार राजा भोज और अन्हिलवाड़ पाटन के सोलंकी राजा भीमदेव द्वारा 1026 से 1042 के बीच बनवाया गया। समय के साथ यह जीर्ण-शीर्ण होने लगा, जिसके बाद सम्राट कुमारपाल ने इसका पुनर्निर्माण कराकर मंदिर की खोई हुई महिमा फिर से स्थापित की।

🗡️ खिलजी का आक्रमण (1299)

⛓️ दिल्ली सल्तनत का कब्ज़ा

1299 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्ज़ा किया, तो अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलुग खान के नेतृत्व में मंदिर को एक बार फिर नष्ट कर दिया गया।

उस युग का वैभव: विनाश से पहले की समृद्धि

🔔 सोने की घंटियाँ और गंगाजल से पूजा

ग्यारहवीं सदी के इस विनाश से पहले सोमनाथ इतना समृद्ध था कि स्थानीय राजाओं ने मंदिर के रखरखाव के लिए हज़ारों गाँव अर्पित कर दिए थे। यहाँ भारी सोने की घंटियाँ ज़ंजीरों पर लटकाई गई थीं, जिनसे शिव-पूजा का समय घोषित होता था। मंदिर तीन विशाल सागौन स्तंभों पर खड़ा था, सैकड़ों नर्तकियाँ शिव की आराधना में नृत्य करती थीं, और गंगाजल मंगवाकर पूजा की जाती थी। तहखानों में रत्न और स्वर्ण संचित थे — यही समृद्धि बार-बार आक्रमणकारियों को आकर्षित करती रही।

🕌 मुस्लिम शासन के उतार-चढ़ाव (1308-1560)

🔁 बार-बार बनना और टूटना

रायनवघन चतुर्थ ने केवल पवित्र लिंग को सुरक्षित रखा, और महिपाल देव ने 1308 से 1325 के बीच पूरे मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। 1348 में राजा रायखेंगर चतुर्थ ने स्थानीय मुस्लिम शासक को हटा दिया, लेकिन मात्र सत्तर वर्ष बाद 1394-95 में गुजरात के सुल्तान मुज़फ़्फ़र खान द्वितीय ने मंदिर को फिर तोड़कर वहाँ मस्जिद बनवा दी। कुछ ही वर्षों में नई मूर्तियाँ स्थापित हुईं, किंतु 1414 में अहमदाबाद के संस्थापक अहमद शाह ने उन्हें फिर हटा दिया। 1451 में रामांडलिक ने मुस्लिम शासन हटाकर मंदिर पुनः स्थापित किया, पर 15वीं सदी के अंत में महमूद बेगड़ा (1459-1511) के शासनकाल में मंदिर को फिर मस्जिद में बदल दिया गया।

🕊️ अकबर से औरंगज़ेब तक

⚖️ दो सौ साल की शांति, फिर विध्वंस

1560 में अकबर के शासनकाल में हिंदुओं ने मंदिर वापस लेकर उसे पुनर्स्थापित किया, और लगभग दो सौ वर्षों तक यहाँ शांति बनी रही। बाद में औरंगज़ेब और मांगरोल के शेख ने मंदिर को अपवित्र किया, और 1706 में मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर इसे फिर ध्वस्त कर दिया गया।

🏵️ अहिल्याबाई होल्कर का पुनर्निर्माण

🙌 भक्ति से बना मंदिर

मंदिर का अगला बड़ा जीर्णोद्धार 1783 (कुछ स्रोतों में 1787) में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया। भारत के स्वतंत्र होने से पहले ही यह मंदिर फिर से स्थापित हो चुका था।

🇮🇳 स्वतंत्र भारत में सातवाँ पुनर्निर्माण

🏗️ सरदार पटेल का संकल्प

भारत के लौह पुरुष और प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 13 नवंबर 1947 को मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। आज का सोमनाथ मंदिर उसी मूल स्थल पर बना सातवाँ मंदिर है।

🎉 11 मई 1951 का उद्घाटन

11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ज्योतिर्लिंग का उद्घाटन किया और कहा कि यह मंदिर विनाश पर निर्माण की जीत का प्रतीक है। इस अवसर पर 101 तोपों की सलामी दी गई और सैकड़ों ब्राह्मणों ने वेदपाठ किया। आज मंदिर का प्रबंधन श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन है, जिसके पहले अध्यक्ष सरदार पटेल स्वयं थे और बाद में पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने भी यह पद संभाला।

📜 एक नज़र में: सोमनाथ का पुनर्निर्माण-चक्र

काल / वर्षघटना
~2000 वर्ष पूर्वपहला मंदिर स्थापित
649 ई.राजा मैत्रक द्वारा जीर्णोद्धार
815 ई.नागभट्ट द्वितीय द्वारा तीसरा निर्माण
11वीं शताब्दीमहमूद गज़नवी का विनाशकारी आक्रमण
1026–1042भोज परमार व भीमदेव द्वारा चौथा मंदिर
1299खिलजी सेना द्वारा विध्वंस
1308–1325महिपाल देव द्वारा पुनर्निर्माण
1394–95मुज़फ़्फ़र खान द्वितीय द्वारा विध्वंस
1451रामांडलिक द्वारा पुनर्स्थापन
1560अकबर के काल में हिंदुओं को वापसी
1706औरंगज़ेब द्वारा अंतिम विध्वंस
1783अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्माण
1951स्वतंत्र भारत में सातवाँ मंदिर प्रतिष्ठित
⚠️ ध्यान दें: यह लेख ऐतिहासिक कथाओं और परंपरागत विवरणों पर आधारित है, जो अलग-अलग स्रोतों में थोड़े भिन्न वर्ष और आँकड़े बताते हैं। किसी भी शोध या शैक्षणिक उपयोग से पहले प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों से तिथियों की पुष्टि अवश्य करें।

🙏 निष्कर्ष

सोमनाथ मंदिर की कहानी सिर्फ ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि आस्था की अडिगता की कहानी है। सात बार तोड़े जाने के बावजूद यह मंदिर हर बार पहले से अधिक भव्यता के साथ खड़ा हुआ — और आज भी यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

सोमनाथ मंदिर के लाइव दर्शन और आरती का समय जानने के लिए जुड़े रहें।

लाइव दर्शन देखें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सोमनाथ मंदिर पहली बार कब बना था?

पहला मंदिर लगभग 2000 वर्ष पहले अस्तित्व में आया माना जाता है, जिसका जीर्णोद्धार वर्ष 649 में राजा मैत्रक ने कराया।

सोमनाथ मंदिर कुल कितनी बार तोड़ा गया?

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार मंदिर कई बार आक्रमणों में नष्ट हुआ और हर बार पुनर्निर्मित किया गया; आज का मंदिर इसी स्थल पर बना सातवाँ मंदिर माना जाता है।

महमूद गज़नवी ने सोमनाथ पर हमला क्यों किया?

पारंपरिक विवरणों के अनुसार महमूद गज़नवी मंदिर की अपार संपत्ति और मूर्ति को नष्ट करने के इरादे से आया था, और भारी धनराशि की पेशकश ठुकराकर उसने मंदिर को लूटा व नष्ट किया।

आज का सोमनाथ मंदिर कब बनकर तैयार हुआ?

वर्तमान मंदिर का उद्घाटन 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया था।

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प किसने लिया था?

सरदार वल्लभभाई पटेल ने 13 नवंबर 1947 को मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था।

सोमनाथ मंदिर आज किसके प्रबंधन में है?

मंदिर का प्रबंधन आज श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन है, जिसके पहले अध्यक्ष सरदार पटेल थे।

सोमनाथ मंदिर किस ज्योतिर्लिंग की श्रेणी में आता है?

सोमनाथ मंदिर को भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है।

अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर का पुनर्निर्माण कब कराया?

महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर का पुनर्निर्माण 1783 (कुछ विवरणों में 1787) में करवाया था।

Related posts

Leave a Comment