सूरत में B-Tech के छात्र ने बनाई 1 पहिये वाली अद्भुत बाइक



क्या आप कभी सोच सकते हैं कि एक ऐसी बाइक हो जिसमें हैंडल हो, सीट हो, लेकिन पहिया सिर्फ एक हो? और सबसे बड़ी बात, यह बाइक न तो पेट्रोल पीती है और न ही आपके बटुए को हल्का करती है। जब पेट्रोल के दाम 100 रुपये के पार जा चुके हैं, तब गुजरात के 'डायमंड सिटी' सूरत की गलियों में एक ऐसी सवारी दिखी है जिसने वहां से गुजरने वाले हर शख्स को रुकने पर मजबूर कर दिया। न कोई शोर, न कोई धुआं, और खर्चा सिर्फ एक चॉकलेट से भी कम! यह कोई जादू नहीं, बल्कि सूरत के एक होनहार इंजीनियर का आविष्कार है। आखिर कैसे बैलेंस होती है यह एक पहिये वाली बाइक? और क्या यह भविष्य की सवारी बनने वाली है? आइये जानते हैं इस तकनीकी चमत्कार के बारे में।

सूरत में B-Tech के छात्र ने बनाई 1 पहिये वाली अद्भुत बाइक


भारत में जुगाड़ और इनोवेशन (Innovation) की कोई कमी नहीं है। इसी कड़ी में सूरत के एक B-Tech Engineering Student ने अपनी पढ़ाई और हुनर का इस्तेमाल कर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। इस छात्र ने एक 'सेल्फ-बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक यूनिसाइकिल' (Self-Balancing Electric Unicycle) तैयार की है, जो दिखने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म की मशीन लगती है।

1 रुपये में 40 किलोमीटर? यह गणित कैसे काम करता है?

अक्सर जब हम Electric Vehicle (EV) Efficiency की बात करते हैं, तो लोग दावों पर यकीन नहीं करते। लेकिन इस बाइक का गणित बहुत सीधा है। यह बाइक पूरी तरह से बैटरी पर चलती है।

  • बिजली की खपत: इस बाइक को फुल चार्ज होने में बिजली की बहुत कम यूनिट खर्च होती है। अगर हम मान लें कि 1 यूनिट बिजली की कीमत 7 से 8 रुपये है, तो यह बाइक 1 यूनिट का भी बहुत छोटा हिस्सा चार्जिंग में लेती है।
  • माइलेज: एक बार फुल चार्ज होने पर यह आसानी से 30 से 40 किलोमीटर तक चल सकती है।
  • लागत: इस हिसाब से प्रति किलोमीटर का खर्च कुछ पैसों में आता है, जो पेट्रोल वाली बाइक (जिसका खर्च 2-3 रुपये प्रति किमी है) के मुकाबले नगण्य है।

🚀 टेक्नोलॉजी: बिना स्टैंड के कैसे खड़ी रहती है यह बाइक?

इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत इसका संतुलन (Balance) है। इसमें Gyroscopic Sensor Technology का उपयोग किया गया है।

यह कैसे काम करता है?
जैसे ही आप आगे की तरफ झुकते हैं, सेंसर मोटर को आगे बढ़ने का संकेत देता है। जब आप पीछे झुकते हैं, तो यह ब्रेक लगाती है या धीमी हो जाती है। यह वही तकनीक है जो दुनिया भर में महंगे 'Segway' में इस्तेमाल होती है, लेकिन सूरत के इस छात्र ने इसे बेहद कम लागत में 'मेड इन इंडिया' (Make in India) के तहत तैयार किया है।

बाइक के फीचर्स जो इसे खास बनाते हैं

सूरत के इस युवा आविष्कारक ने इस बाइक को भारतीय सड़कों के हिसाब से डिजाइन किया है। इसमें वो सभी जरुरी फीचर्स हैं जो एक राइडर को चाहिए:

फीचर विवरण
पहिये (Wheels) सिर्फ 1 (चौड़ा टायर बेहतर ग्रिप के लिए)
बैटरी प्रकार Lithium-Ion Battery (फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ)
वजन क्षमता यह आसानी से एक वयस्क व्यक्ति का वजन उठा सकती है।
पोर्टेबिलिटी हल्की होने के कारण इसे उठाकर कहीं भी ले जाया जा सकता है।
ईंधन (Fuel) 100% इलेक्ट्रिक (Eco-Friendly)

EV का भविष्य (High Earning Potential)

आज के समय में Best Electric Scooters in India और EV Battery Technology जैसे विषय सबसे ज्यादा सर्च किये जा रहे हैं। सूरत का यह आविष्कार यह साबित करता है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन रहा है।



यदि इस प्रोजेक्ट को किसी बड़ी Automobile Company का साथ मिल जाए या स्टार्टअप फंडिंग मिल जाए, तो यह कॉलेज कैंपस, बड़े ऑफिस कॉम्प्लेक्स और शॉर्ट-डिस्टेंस ट्रेवल के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। यह Green Energy Solutions की दिशा में एक बड़ा कदम है।

छात्र का संघर्ष और प्रेरणा

B-Tech के दौरान अक्सर छात्रों को प्रोजेक्ट बनाने होते हैं। लेकिन ज्यादातर छात्र बने-बनाए प्रोजेक्ट्स जमा कर देते हैं। सूरत के इस छात्र ने अलग रास्ता चुना। उसने कबाड़ और नए पार्ट्स का सही संयोजन करके इसे बनाया। इसमें मोटर कंट्रोलर, बीएलडीसी मोटर (BLDC Motor) और थ्रॉटल सिस्टम का सटीक इंजीनियरिंग तालमेल देखने को मिलता है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 1 पहिये वाली बाइक चलाना सुरक्षित है?

हाँ, इसमें सेल्फ-बैलेंसिंग सेंसर लगे होते हैं जो इसे गिरने नहीं देते। हालांकि, इसे चलाने के लिए थोड़ी प्रैक्टिस की जरूरत होती है, जैसे साइकिल सीखने में होती है।

इस बाइक की कीमत (Price) कितनी होगी?

चूंकि यह अभी एक प्रोटोटाइप (Prototype) है, इसकी बाजार कीमत तय नहीं है। लेकिन इसे बनाने की लागत सामान्य इलेक्ट्रिक स्कूटर से काफी कम है। मास प्रोडक्शन में इसकी कीमत 30-40 हजार रुपये के आसपास हो सकती है।

क्या इसे आरटीओ (RTO) से पास कराना होगा?

भारत में कम स्पीड वाले (25 kmph से कम) इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। अगर इसकी स्पीड कम है, तो यह बिना लाइसेंस चलाई जा सकती है।

यह बाइक एक बार चार्ज करने में कितना समय लेती है?

इसमें लगी लिथियम बैटरी को सामान्य घरेलू सॉकेट से फुल चार्ज होने में लगभग 2 से 3 घंटे का समय लगता है।

निष्कर्ष

सूरत के इस B-Tech छात्र का आविष्कार यह बताता है कि महँगे पेट्रोल का रोना रोने के बजाय, समाधान ढूंढना ही असली इंजीनियरिंग है। यह 'एक पहिये वाली बाइक' सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या का एक स्मार्ट जवाब है। हमें ऐसे ही 'लोकल फॉर वोकल' (Vocal for Local) टैलेंट को बढ़ावा देना चाहिए।

क्या आप भी ऐसी बाइक चलाना चाहेंगे? कमेंट में अपनी राय जरूर दें!


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NOTE : यहां दी गई जानकारी एक सामान्य अनुमान और धारणा ओ के आधारित हे किसी भी जानाकरी कोई निष्कर्ष पर कृपया ना पोहचे। जानकारी के अनुरूप Expert की सलाह जरूर ले. धन्यवाद

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