पिछले कुछ समय में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में 2000 रुपये, 500 रुपये, 200 रुपये, 100 रुपये, 50 रुपये और 10 रुपये के नए नोट जारी किए हैं। इसे नकली नोटों को बंद करने के लिए अच्छा कदम माना गया था। लेकिन अब इन नए नोटों की भी कॉपी बनाई जा रही है। बाजार में नकली नोट दिन प्रति दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। नकली नोट जांचने की आपको कई तरकीबें पता होंगी, फिर भी रुपये से संबंधित कई सारी बाते ऐसी हैं जिसके बारे में आप नहीं जानते होंगे। ऐसे में हम आज आपको भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके माध्यम से आप आसानी से नकली नोटों की पहचान कर पाएंगे।


आरबीआई द्वारा जारी किए गए नोटों के सिक्योरिटी थ्रेड पर तीन शब्द लिखे होंगे- भारत, RBI और 2000। इसके साथ ही नोट के बाई ओर देवनागरी में उसकी कीमत लिखी होती है और एक वॉटरमार्क भी होता है। वहीं नोट के बीच में महात्मा गांधी की तस्वीर होगी। नोट के दाईं ओर अशोक स्तंभ बना होता है। नोट के पिछले हिस्से पर गौर करने पर आप पाएंगे कि इसके बाईं ओर इसका प्रिंटिंग वर्ष मुद्रित होगा। मंगलयान की तस्वीर नोट के बीच में साफ दिखाई देगी।


आरबीआई द्वारा जारी नोट पर एक ज्योमैट्रिक पैटर्न है, जो गांधी जी की तस्वीर के बिल्कुल करीब है। जब नोट को तिरछा किया जाता है तो सिक्योरिटी थ्रेड का रंग हरे से नीले की ओर बदलता है। महात्मा गांधी सीरीज के नए नोट में आरबीआई के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। इसके साथ ही नोट पर स्वच्छ भारत का लोगो भी होगा।

दृष्टिबाधित ऐसे पहचानें
दृष्टिबाधित लोग भी नोटों की पहचान कर सकते हैं। नोट के आगे के हिस्से पर बाईं और दाईं ओर सात लाइन बनी होती हैं। आयताकार आकृति में उभरे अक्षरों में नोट की कीमत लिखी होती है। नोट पर महात्मा गांधी की आकृति और अक्षरों में लिखी कीमत उभरी हुई होती है। इसके साथ ही नोट पर अशोक स्तंभ की आकृति भी उभरी हुई होगी।

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ये है नोटों का साइज
आरबीआई दावारा जारी किए गए नोटों का एक तय साइज होता है। 2000 रुपये के नोट का साइज 66×166 एमएम होता है। वहीं 500 रुपये के नोट का साइज 66×150 एमएम होता है। 200 और 100 रुपये के नोट का साइज क्रमश: 66x146 और 66x142 एमएम होता है। 100 रुपये के नोट का साइज होता है 63x142 एमएम और 50 रुपये के नोट सा साइज 66x135 एमएम है। आरबीआई द्वारा जारी किए गए 10 रुपये के नोट का साइज 63x123 एमएम होता है।

यदि आपको नकली नोट की पहचान करने में कोई दिक्कत हो रही है तो आप paisaboltahai.rbi.org.in वेबसाइट पर नए नोट की पूरी जानकारी फोटो और ग्राफिक्स के साथ समझ सकते हैं। इस वेबसाइट पर सभी नोट के फीचर्स की जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही करेंसी नोटों की पहचान मोबाइल फोन के माध्यम से करने के लिए सरकार जल्द ही एक व्यवस्था लाने जा रही है। इसके लिए बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को एक विशेष मोबाइल ऐप बनाने की जिम्मेदारी दी है। इस ऐप को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य दृष्टि बाधितों को नोट पहचानने में सहायता करना है। लेकिन कोशिश यह भी की जा रही है कि इसी से नोटों के असली और नकली होने की पहचान भी हो सके।

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करेंसी नोटों की पहचान मोबाइल फोन के माध्यम से करने के लिए सरकार जल्द ही एक व्यवस्था लाने जा रही है। इसके लिए बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को एक विशेष मोबाइल ऐप बनाने की जिम्मेदारी दी है।

इस ऐप को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य दृष्टि बाधितों को नोट पहचानने में सहायता करना है। लेकिन कोशिश यह भी की जा रही है कि इसी से नोटों के असली और नकली होने की पहचान भी हो सके।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आरबीआई एक ऐसा ऐप बनाने की संभावना तलाश रहा है, जिससे दृष्टि बाधित व्यक्ति भी जान सके कि यह भारतीय नोट है और कितने रुपये का नोट है। उन्होंने आगे कहा कि करेंसी नोट की पहचान से संबंधित ऐप को बनवाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए एजेंसी का चयन होने के बाद पता चलेगा कि ऐप कितने दिन में तैयार होगा।

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कैसे करेगा ऐप काम
इस ऐप को खोलकर कैमरे के सामने नोट रखते ही ऐप पहचान कर बोली के माध्यम से बताएगा कि यह भारत का नोट है और कितने रुपये का नोट है।  इसके साथ ही कोशिश यह भी रहेगी कि ऐप यूजर को यह जानकारी किसी और तरीके से भी दी जा सके, जिससे अगर कोई दृष्टि बाधित व्यक्ति वधिर हो तो भी उसे नोट की जानकारी मिल आसानी से मिल सके।

102 अरब नोट हैं चलन में

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुताबिक, 31 मार्च, 2019 तक देश में कुल 102 अरब नग करेंसी नोट चलन में थे। अभी एक रुपया के कुछ नोट समेत 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 2,000 रुपये के कुल 18 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में हैं।

100 रुपये व उससे अधिक मूल्य के नोट में इंटेग्लिओ प्रिंटिंग बोर्ड तकनीक के पहचान के निशान हैं, जिसे दृष्टि बाधित व्यक्ति छू कर पहचान जाते हैं। लेकिन पुराने नोट में ये निशान घिस जाते हैं, जिनकी पहचान में दृष्टि बाधितों को मुश्किल होती है।

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