3 से 12 वीं तक की परीक्षा अब बोर्ड लेगा, स्कूलों में केवल NCERT की किताबें पढ़ाई जाएंगी

3 से 12 वीं तक की परीक्षा अब बोर्ड लेगा, स्कूलों में केवल NCERT की किताबें पढ़ाई जाएंगी।

गुजरात बोर्ड से संबद्ध सभी प्राथमिक स्कूलों में एक समान परीक्षा संरचना तैयार की जाएगी। राज्य सरकार ने बुधवार को कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।


प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के सचिव विनोद राव ने कहा कि GSHSEB (गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) और प्रत्यक्ष, प्राथमिक शिक्षा से संबंधित सभी स्कूलों में कक्षा 3 से कक्षा 12 तक एक वार्षिक और 6 मासिक परीक्षा के सभी पेपर अब GSHSEB और GCERT द्वारा बनाकर भेजा जाएगा।

परीक्षा प्रश्नपत्र GCERT /  GSHSEB निकालेंगे


सरकार ने अगले नए शैक्षणिक वर्ष से राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.5 करोड़ छात्रों की परीक्षा की निति में बदलाव का फैसला किया है। शैक्षणिक स्रोतों के अनुसार, अब तक Std 3 to 9 और 11 वी कक्षा पेपर स्कूल ही निकाल रहा था। जिसके कारण कुछ पाठ्यक्रम को स्कुल बंद करने लगा था । स्कूल पेपर निकल ने कारण, ट्यूशन जैसे दूषण विकसित हो गया था। इसके अलावा, काफी सारे सवाल बार बार पूछते थे जीसे स्टूडेंट रट्टा मारने लगे थे। इसलिए, बोर्ड के आधार पर प्रश्न पत्र निकालने का निर्णय लिया गया है। अब से Std 9,10,11,12 गुजरात शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) और Std 3 से 8 के GCERT निकालेगा। प्रश्न पत्रों को जिला स्तर पर छापे जायँगे और उत्तरवी का मूल्यांकन SVS स्तर ही किया जाएगा।

शिक्षा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गुजरात के 55,000 सरकारी और निजी और स्व-वित्त विद्यालयों की शिक्षा एक समान रहे। इससे 100 मिलियन छात्रों को लाभ होगा।

प्राथमिक विद्यालय के छात्रों की परीक्षा गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) द्वारा तैयार की जाएगी, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक छात्रों की परीक्षा के लिए GSHSEB गेट। इसके अलावा, राज्य के स्कूलों को NCERT पुस्तकों का उपयोग ही करना पड़ेगा, जो गुजरात राज्य टेक्स्ट बोर्ड द्वारा तैयार की गई हैं।

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क्यों लेना पड़ा ये निर्णय ?

काफी स्कूल में ज्यादातर अभ्यासक्रम रद्द कर दिया जाता था, विधार्थी सिर्फ रट्टा मारने लगे थे क्योकि हर बार एक ही तरह के प्रश्नपत्र निकाले जाते थे.

प्राइवेट क्लासिस क्रेज की वजह से काफी स्टूडेंट को परेशान किया जाता था. जो विधार्थी स्कूल के टीचर्स के पास ट्यूशन नहीं जाते थे

परीक्षा के पेपर का मूल्याँकन स्कूल में ही होने की वजह से काफी सलेब्स पढ़ाते नहीं थे, और उसकी वजह से प्राइवेट क्लासिस क्रेज बढ़ गया था

निजी प्रकाशन के पुस्तक जबरन लेने पड़ते थे विद्यार्थी को जो काफी महंगे होते थे और साथी ही में समान शिक्षण के नियम का भी उलंघन होता था 

विनोद राव ने कहा कि इस तरह के दृष्टिकोण से शिक्षा में सुधार होगा और छात्रों को JEE, NEET आदि जैसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं और अंतरराष्ट्रीय परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलेगी।

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