डिजिटल दुनिया में स्क्रीनशॉट बड़ा मायने रखता है और कई मामलों में तो सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट दिया जाता है। यदि आपको याद हो तो फेसबुक में एक सिक्योरिटी फीचर है जिसे ऑन करने के बाद कोई आपकी प्रोफाइल पिक्चर का स्क्रीनशॉट नहीं ले सकता है, वहीं अब यह फीचर व्हाट्सऐप में आने वाला है।

दरअसल सिक्योरिटी को बढ़ाते हुए व्हाट्सऐप ने यह फैसला लिया है। जल्द ही व्हाट्सऐप इस फीचर को जारी करेगा, फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। इस फीचर के आने के बाद आपको एक सेटिंग करनी होगी और यह सेट करना होगा कि आप कितनी देर बाद अपने पोस्ट या मैसेज को लॉक करना चाहते हैं।

हालांकि व्हाट्सऐप का यह फीचर सिर्फ प्राइवेट चैट के लिए होगा, ना कि व्हाट्सऐप ग्रुप चैट के लिए। व्हाट्सऐप के इस फीचर की जानकारी WABEtaInfo ने दी है। नए फीचर को ऑन करने के लिए आपको फिंगरप्रिंट सेंसर लॉक का इस्तेमाल करना होगा। व्हाट्सऐप के इस फीचर को लेकर लोगों ने विरोध भी किया है। उनका कहना है कि यह उनका निजी मामला है, वे स्क्रीनशॉट लेंगे या नहीं, वही तय करेंगे ना कि व्हाट्सऐप।


सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के सीईओ और संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने एलान किया कि उनकी सहयोगी कंपनी व्हाट्सऐप जल्द ही भारत में अपनी पेमेंट सेवा को शुरू करने जा रही है। इस सेवा को शुरू करने के लिए अभी कंपनी अपनी तरफ से सारी तैयारियां कर रही है।

गोपनीय तरीके से होगा पेमेंट
मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि व्हाट्सऐप पे सेवा उसकी चैटिंग सेवा की तरह गोपनीय रहेगी। कंपनी फिलहाल इसकी देश में टेस्टिंग कर रही है। जल्द ही इसको पूरे विश्व में लांच कर दिया जाएगा।



नहीं बताई डेडलाइन
जुकरबर्ग ने फिलहाल इसकी डेडलाइन नहीं बताई है कि आखिर कब वो इसको लांच करेंगे। कंपनी ने कहा कि भारत में डाटा को स्थानीय स्तर पर रखने की मांग की वजह से काफी देरी हो रही है।

इन तीन देशों में सबसे ज्यादा यूजर्स
फेसबुक के सबसे ज्यादा यूजर्स भारत, इंडोनेशिया और फ्लीपिंस में हैं। यह  पिछले वर्ष की तुलना में 8 फीसदी अधिक है। यही वजह है कि अब जुकरबर्ग इस प्लेटफार्म को दूसरे बिजनेस से जोड़कर ज्यादा मुनाफा हासिल करना चाहते हैं। व्हाट्सऐप के अलावा कंपनी के इंस्टाग्राम और फेसबुक भी जरूरी हैं, जो उसकी ग्रोथ को दर्शाते हैं।

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नहीं हो पाएगा गोपनीय तरीके से पेमेंट
हालांकि जुकरबर्ग का यह कहना कि पेमेंट भी चैटिंग की तरह गोपनीय तरीके से हो सकता है, ऐसा मुमकिन नहीं है। भारत में बैंकिंग नियमों  को आरबीआई तय करता है। बैंक खातों के जरिए जो भी लेन-देन होता है, उसकी जानकारी आरबीआई के अलावा आयकर विभाग सहित तमाम एजेंसियों को होती है।

आपको केवाईसी देनी होगी, जिसमें पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाता नंबर जरूरी है। इसलिए इस सेवा को गोपनीय तरीके से प्रयोग करने की बात कहना कहीं से भी गले नहीं उतर रहा है। इसलिए हमारा मानना है कि जुकरबर्ग समेत पूरी कंपनी को भारत में इस सेवा को शुरू करने से पहले आरबीआई, केंद्र सरकार के सभी नियमों का पालन करना पड़ेगा।